बैतूल, मध्य प्रदेश: जनवरी 2026 की शुरुआत के साथ ही बैतूल जिला प्रशासनिक कड़ाई और बड़े नीतिगत बदलावों के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। शहर के प्रवेश द्वारों और प्रमुख विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान, प्रशासन ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक कड़ा संदेश दिया है।
स्वच्छता अभियान और प्रशासनिक सख्ती: जिले में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत बने शौचालयों की बदहाली को लेकर है। हाल ही में हुए निरीक्षण में यह सामने आया कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी स्लम क्षेत्रों के शौचालय शोपीस बने हुए हैं। वहां न केवल गंदगी का अंबार है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाई और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि लापरवाही जारी रही, तो संबंधित सचिवों और ठेकेदारों को तत्काल सस्पेंड किया जाएगा। ‘सत्य और पारदर्शिता’ के इस अभियान ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
सांस्कृतिक पहचान: मुलताई अब ‘मुलतापी’: मुख्यमंत्री द्वारा बैतूल दौरे के दौरान की गई सबसे बड़ी घोषणा मुलताई शहर का नाम बदलकर ‘मुलतापी’ करने की है। ताप्ती नदी के उद्गम स्थल होने के नाते, स्थानीय लोग लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। सरकार का यह कदम जिले की सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों को सम्मान देने के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, बल्कि क्षेत्र की एक नई पहचान भी स्थापित होगी।
बुनियादी ढांचे का विकास: बैतूल के ‘सतपाद्वार’ (प्रतीकात्मक मुख्य द्वार) और अन्य प्रमुख मार्गों के लिए सरकार ने बड़े बजट को मंजूरी दी है। गंज आबकारी से कर्बला तक 28.75 करोड़ रुपये की लागत से टू-लेन सीसी रोड के निर्माण को तकनीकी मंजूरी मिल गई है। इससे शहर के यातायात की समस्या का स्थायी समाधान होगा। साथ ही, नेशनल हाईवे पर खराब सड़कों के कारण केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा अधिकारियों की क्लास लगाए जाने के बाद, मरम्मत और नई सड़कों का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।
अपराध और सुरक्षा: सुरक्षा के मोर्चे पर, बैतूल पुलिस ने हाल ही में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के एक बड़े मामले का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से 23.50 लाख रुपये की ठगी की गई थी। इसके अलावा, अवैध वसूली और सट्टा कारोबार के खिलाफ भी पुलिस “सत्य और न्याय” की राह पर चलते हुए सख्त अभियान चला रही है।
सामाजिक समरसता और पर्यावरण: चिचोली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में ‘अनुभूति कार्यक्रमों’ के माध्यम से युवाओं को प्रकृति और वन्य जीवन से जोड़ा जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बीच, जिला प्रशासन ने ‘अलाव’ और रैन बसेरों की व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है ताकि किसी भी गरीब या असहाय व्यक्ति को कठिनाई का सामना न करना पड़े।
