बेतुल जिले के बालहेगाँव गांव की महिलाओं ने कलेक्टरेट के बाहर पानी की गंभीर कमी को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह मामला गांव में लंबे समय से व्याप्त पेयजल संकट का हिस्सा है। स्थानीय महिलाओं ने प्रशासन पर यह आरोप लगाया कि सरकार द्वारा प्रदान की जा रही नकद सहायता उनके लिए किसी काम की नहीं है, जब तक उन्हें स्वच्छ और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता। उन्होंने बताया कि गांव में कई घरों में नल और पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं और लंबे समय से उनकी मरम्मत नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों को पीने और घरेलू कामों के लिए पानी के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कलेक्टरेट तक पैदल मार्च किया और हाथों में बैनर और प्लेकार्ड लेकर पानी की समस्या को उजागर किया। उन्होंने कहा कि केवल नकद सहायता देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्हें स्थायी और प्रभावी समाधान चाहिए, जिसमें गांव की नलों और पाइपलाइनों की मरम्मत, नए जल स्रोतों की स्थापना और नियमित पानी की आपूर्ति शामिल हो। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए और उन्हें जल संकट से निजात दिलाई जाए।
महिलाओं का कहना है कि पानी की कमी ने उनके जीवन को अत्यंत कठिन बना दिया है। उन्हें पीने, खाना बनाने और घरेलू कामों के लिए दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रत्यक्ष असर पड़ा है। स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ गई हैं क्योंकि स्वच्छ पानी की कमी से बीमारियों का खतरा अधिक हो गया है। महिलाएं कहती हैं कि सरकार की ओर से समय-समय पर दी जाने वाली नकद सहायता उनके लिए केवल अल्पकालिक राहत है, जबकि मूल समस्या का समाधान नहीं है।
इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया कि वे तुरंत उपाय करें। उन्होंने सुझाव दिया कि गांव में नए बोरवेल बनाए जाएं, पाइपलाइन की मरम्मत की जाए, और नियमित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। महिलाओं ने यह भी कहा कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगी।
प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि पानी जीवन का मूलाधार है और इसके बिना कोई भी सरकारी योजना या नकद सहायता अर्थहीन है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत कार्यवाही करने की मांग की, ताकि गांव में सभी लोगों को स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके।
इस प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और वे किसी भी प्रकार की उपेक्षा को बर्दाश्त नहीं करेंगी। यह घटना प्रशासन और सरकार के लिए एक चेतावनी भी है कि जल आपूर्ति और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी का असर सीधे ग्रामीण जीवन पर पड़ता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बालहेगाँव गांव की महिलाओं का यह संघर्ष उनके समुदाय की मजबूती और ग्रामीणों के अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए भी ग्रामीण अपनी आवाज उठाने और न्याय मांगने से पीछे नहीं हटेंगे।
