बैतूल में आयोजित मिलीट्स मेला इस वर्ष भी अपने अनूठे और पारंपरिक उत्साह के लिए मशहूर रहा। इस मेला में किसानों, व्यवसायियों और आम जनता के साथ-साथ पर्यटकों की भारी भीड़ ने इसे और भी जीवंत बना दिया। हर साल की तरह इस बार भी मेले में बाज़ार, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और लोकनृत्य ने अपनी छाप छोड़ी। लेकिन इस बार मेले का आकर्षण और बढ़ गया जब पद्मश्री लहरी बाई अपनी उपस्थिति से मंच पर आईं।
पद्मश्री लहरी बाई, जो कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं, ने मेले की शोभा को और बढ़ाया। उनके आने से न केवल स्थानीय लोग बल्कि पर्यटक भी उत्साहित दिखे। उन्होंने मंच से अपने अनुभव साझा किए और किसानों को कृषि के नये और आधुनिक तरीकों के बारे में जानकारी दी। उनका भाषण प्रेरणादायक और सरल था, जिससे हर वर्ग के लोग उससे जुड़ पाए। लहरी बाई ने खासकर स्थानीय किसानों को कृषि में नई तकनीकों को अपनाने और उनकी पैदावार बढ़ाने पर जोर दिया।
मेले में उनकी भागीदारी से युवाओं में भी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने युवा किसानों को नई सोच, नवाचार और जोखिम उठाने की प्रेरणा दी। इसके अलावा लहरी बाई ने स्थानीय हस्तशिल्प और कारीगरों के उत्पादों को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया। उनके सुझावों और मार्गदर्शन से कारीगरों ने अपने उत्पादों को बेहतर बनाने और बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए नए उपाय सीखे।
इस अवसर पर मेले में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं, खेलों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों और युवाओं ने भी अपने कला और प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिससे मेला और भी रंगीन और जीवंत बन गया। लहरी बाई ने इन प्रस्तुतियों की सराहना की और प्रतिभागियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया।
मेला में खाद्य स्टाल, जैविक उत्पाद, हस्तशिल्प, और कृषि उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगी हुई थी। लहरी बाई ने इन स्टालों का दौरा किया और उत्पादकों से उनकी कठिनाइयों और आवश्यकताओं के बारे में चर्चा की। उन्होंने प्रशासन और स्थानीय निकायों से आग्रह किया कि इस प्रकार के मेलों का आयोजन नियमित रूप से किया जाए ताकि किसान और कारीगर अपने उत्पादों और प्रतिभा को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित कर सकें।
