बैतूल पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता, सतत प्रयास और प्रभावी पुलिसिंग का परिचय देते हुए 159 गुमशुदा बालिकाओं को सुरक्षित खोजकर उनके परिवारों से मिलाया। यह उपलब्धि न केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक विश्वास को भी मजबूत करती है। लंबे समय से अपने बच्चों की तलाश में भटक रहे परिजनों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। बालिकाओं की सकुशल वापसी से पूरे जिले में पुलिस की कार्यशैली की सराहना हो रही है और आमजन में सुरक्षा का भाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
यह सफलता पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में चलाए गए विशेष अभियान का परिणाम है, जिसमें थाना स्तर पर अलग-अलग टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने आधुनिक तकनीक, मोबाइल ट्रैकिंग, सोशल मीडिया, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सीमावर्ती जिलों में सघन तलाश अभियान चलाया। पुलिस ने परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखा और हर छोटी जानकारी को गंभीरता से लिया। कई मामलों में अन्य राज्यों की पुलिस से भी समन्वय स्थापित कर बालिकाओं को खोजने में सफलता हासिल की गई।
बैतूल पुलिस ने यह भी सुनिश्चित किया कि बरामद की गई सभी बालिकाओं की काउंसलिंग की जाए और उनकी मानसिक स्थिति को समझा जाए। कई बालिकाएं घरेलू विवाद, पढ़ाई का दबाव, बहकावे या गलत संगति के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। पुलिस ने उन्हें समझाइश दी और परिवारों को भी संवेदनशील रहने की सलाह दी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जरूरतमंद बालिकाओं को महिला एवं बाल विकास विभाग की मदद से परामर्श और संरक्षण भी उपलब्ध कराया गया।
इस अभियान में महिला पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उन्होंने बालिकाओं से सहज संवाद स्थापित किया, जिससे वे बिना भय के अपनी बात रख सकीं। पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ जैसे अभियानों के तहत स्कूलों, गांवों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से अभिभावकों और बच्चों को सुरक्षित रहने, अनजान लोगों से दूरी बनाए रखने और किसी भी समस्या में तुरंत पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।
159 गुमशुदा बालिकाओं की सुरक्षित वापसी बैतूल पुलिस की प्रतिबद्धता, मेहनत और मानवीय दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। यह अभियान समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश देता है कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि संकट के समय भरोसेमंद सहारा भी है। बैतूल पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो, तो हर खोया हुआ मुस्कान फिर से लौटाई जा सकती है।
