बैतूल जिले में सामने आए छात्रवृत्ति घोटाले ने पूरे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बहुचर्चित मामले में अब तीसरी गिरफ्तारी होने के बाद जांच और तेज़ हो गई है। पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की संयुक्त कार्रवाई में एक और आरोपी को हिरासत में लिया गया है, जिस पर फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए छात्रवृत्ति की राशि हड़पने का आरोप है।
यह घोटाला मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए दी जाने वाली सरकारी छात्रवृत्ति से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई निजी शिक्षण संस्थानों, दलालों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों छात्रों के नाम पर फर्जी आवेदन किए गए। इन आवेदनों के आधार पर लाखों रुपये की छात्रवृत्ति राशि निकाली गई, जो वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय आरोपियों की जेब में चली गई।
तीसरी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बताया कि आरोपी की भूमिका सिर्फ फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह बैंक खातों के संचालन और रकम के बंटवारे में भी सक्रिय रूप से शामिल था। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने कई छात्रों के आधार कार्ड, समग्र आईडी और प्रवेश से जुड़े कागजात का दुरुपयोग किया। इसके बदले छात्रों को मामूली रकम दी जाती थी, जबकि बड़ा हिस्सा संस्थान संचालकों और दलालों के बीच बांटा जाता था।
इससे पहले दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनसे पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। उन्हीं खुलासों के आधार पर तीसरे आरोपी तक पुलिस पहुंच सकी। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच का दायरा बढ़ाते हुए कुछ शिक्षण संस्थानों के रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और सरकारी पोर्टल पर किए गए आवेदनों की गहन जांच की जा रही है।
छात्रवृत्ति घोटाले के सामने आने के बाद जिले के छात्र और अभिभावक आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि जिन छात्रों को वास्तव में आर्थिक सहायता की आवश्यकता थी, उन्हें समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिली, जबकि फर्जीवाड़े के जरिए गलत लोगों ने लाभ उठा लिया। कई छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ संस्थानों ने छात्रवृत्ति न मिलने पर परीक्षा फॉर्म भरने और अंकसूची देने से भी इनकार किया।
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। जिला प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और यदि जांच में किसी सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भविष्य में इस तरह के घोटालों को रोकने के लिए छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
फिलहाल तीसरी गिरफ्तारी के बाद छात्रवृत्ति घोटाला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला न केवल बैतूल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में शिक्षा से जुड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी बनकर उभरा है।
