मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में मां ताप्ती परिक्रमा श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस पावन यात्रा में शामिल होकर मां ताप्ती के प्रति अपनी भक्ति अर्पित करते हैं। यह परिक्रमा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और प्रकृति से जुड़ने की एक गहन आध्यात्मिक प्रक्रिया मानी जाती है।
मां ताप्ती का उद्गम स्थल सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला में स्थित मुलताई क्षेत्र है, जो बैतूल जिले का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। मान्यता है कि मां ताप्ती सूर्यदेव की पुत्री हैं और उनकी परिक्रमा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। परिक्रमा मार्ग में बहती नदी, घने जंगल, पहाड़ और गांव श्रद्धालुओं को प्रकृति के बेहद करीब ले आते हैं।
परिक्रमा आमतौर पर पैदल की जाती है और इसमें कई दिनों का समय लगता है। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में, सिर पर गठरी, हाथ में लाठी और मुख पर भक्ति भाव लिए यात्रा करते हैं। “ताप्ती मैया की जय” के जयकारों से पूरा मार्ग गूंज उठता है। रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोग परिक्रमार्थियों का स्वागत भोजन, पानी और विश्राम की व्यवस्था कर करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता और सेवा भावना का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है।
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू अनुशासन और संयम है। परिक्रमार्थी नंगे पांव चलते हैं, सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और नदी को पार करते समय विशेष नियमों का पालन करते हैं। माना जाता है कि इस तपस्या से मन, शरीर और आत्मा तीनों की शुद्धि होती है। कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर या पारिवारिक सुख-शांति के लिए यह परिक्रमा करते हैं।
बैतूल जिले में प्रशासन और स्थानीय समितियां परिक्रमा के दौरान सुरक्षा, चिकित्सा और स्वच्छता की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित करती हैं। स्वयंसेवी संगठन भी सक्रिय रूप से सेवा कार्यों में जुटे रहते हैं। इससे यह यात्रा और अधिक सुगम और सुरक्षित बन जाती है।
मां ताप्ती परिक्रमा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है। श्रद्धालु नदी को स्वच्छ रखने, प्लास्टिक का उपयोग न करने और प्रकृति के प्रति सम्मान का संकल्प लेते हैं। इस प्रकार यह यात्रा आध्यात्मिकता के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना को भी मजबूत करती है।
